Being vulnerable is not easy, but it can change people’s lives

Women telling their stories openly, owning it and showing the world where it brought them, will empower others to speak up and understand how valuable their life stories and experiences are for the world. #SheIsUdaipur #Empowerwomen #YourStoryMatters

#SheisUdaipur

When women share their stories of personal triumph, they often have the potential to give hope, to inspire and to help change lives #SheisUdaipur @Arcgate

MYRjsim Rana यांनी वर पोस्ट केले शुक्रवार, १२ एप्रिल, २०१९

Inspiring Working Women

When working women share their inspirational, first-hand career stories they can motivate young girls to follow whatever career path they choose regardless of gender. #GenderEquality #CareerWoman #SheIsUdaipur

Breaking shackles of old age traditions can help achieve growth

Parvati Devi, along with a group of women (Mahila Parishad) in the patriarchal heartland of Rajasthan took on the age-old tradition of married women covering their faces in a veil, a practice known as purdah. She and a few others came together to convince their elders in those times to allow them to come out of purdah. The bold move can be seen as an inspiration especially back in the day. But even today – at this age – she is committed to continue to work and wants to create passion amongst young women and youth to seek education for themselves, their children and to step out to work for a better life. #BreakingBarriers #SheIsUdaipur

Women must not limit their aspirations

I have been working at IIM Udaipur as an administrative officer for the past 7 years. I joined this institution when I was just 22 and am the youngest female administrative officer of all the IIM’s and IIT’s in India. I am born and brought up in Udaipur and have done my chartered accountancy which I cleared in first attempt in 2012. Out of the only 4 permanent officers at IIMU, I am the only female permanent employee. The exam to attain this position was as tough as an UPSC exam. In the past, I have been honoured by college of veterinary near dabok. I was also honoured with one among the four women diva’s this year – I am she awardee. Dainik bhaskar invited me as one of the judges for the women’s award 2018 conducted by them. As an Udaipurite and as an IIM officer, I have helped many women of Udaipur and have helped many budding enterprenuers to learn, ideate and build their startups into a successful business through two programs: 1.Incubation centre 2. Women’s development program. #SheIsUdaipur #WomenAchievers

We all have struggles in life, but we have to continue to fight – RJ Mahiya with Neetu Chopra

नौ वर्ष की थी मैं जब mera संघर्ष शुरू हुआ था सबसे पहले नौ साल की थी मैं जब मेरी माँ मुझे हमेशा के लिए अलविदा कह गई थी वो नौ साल के एक बच्चे के लिए माँ के बिना जीवन यापन करना कैसा हो सकता है कि आप स्वयं सो सकते हैं स्पेशियलि 1 लड़की के लिए साल की थी तब पापा ने भी उनका विवाह किया सौतेली माँ घर में आयी और घर परिवार का माहौल ही बदल गया मेरी किसी से बनती नहीं थी इसलिए मुझे हॉस्टल भेज दिया गया विद्या वाड़ी में कक्षा सातवीं में मेरा एडमिशन हुआ फिर से संघर्षों का दौर चलता रहा और मैं एक अनजान जगह अजनबी लोग समझ नहीं आ रहा था कैसे वहाँ पे सामंजस्य बिठाने में कोई दोस्त नहीं बनते थे मेरे बस बस कुछ था तो अकेलापन और मेरी तन्हाई वहाँ एक पीपल का पेड़ हुआ करता था और मैं प्यार से उन्हें पीपल दादा कहकर बुलाया करती थी तू पीपल दादा की छाँव में बैठ करके मैं अपने दुख दर्द के किस्से उन्हें सुना दिया करती थी बस 1 वो ही अपनापन था ।

दसवी कक्षा में मैं राजस्थान बोर्ड की मैरिट लिस्ट में 32 वें स्थान पर तीळ एक तरफ़ जहाँ मेरिट में आने की ख़ुशी थी वहीं दूसरी तरफ़ ग़म के बादल छा गये जब पापा ने कहा कि दसवी के बाद अब नहीं पढ़ाया जाएगा ज़्यादा पढ़कर क्या करोगी फिर शादी नहीं होगीआख़िर तो घर का काम भी करना है इस तरीक़े की बातें मुझे समझे जाने लगी पर मैं सनकी थी इस तरह की बातें मुझे कहाँ समझ पाती भला इस तरह मैं हार मानने वालों में नहीं थी काफ़ी समझाने की कोशिश की मैंने पापा को पर जब वो नहीं माने तो मैंने एक योजना बनायी पैकिंग की है और घर से निकल पड़ी लोगों की नज़रों में मैं घर से भाग चुकी थी समाज में काफ़ी बातें बनने लगी कि ये लड़की घर से दूर रात गुज़ार के आयी हैपता नहीं कहाँ मुँह काला कर रही होगी है और इस तरह से समाज में नाम का समाज में बदनामी फैलने लगी

इस तरह फिर से मुझे घर लाकर कमरे में बंद कर दिया गया तथा क़ैदी की तरह ट्रीटमेंट मिलने लगा, रिश्ते आने लगे, मुझे बस ख़ून सवार था कुछ भी कर के पढ़ायी करनी है और कुछ बनना है जब रिश्ते आने लगे तो मैंने ग़ुस्से में आकर कहा की अभी में नाबालिग़ हूँ अगर आपलोगों ने मेरे साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की तो मजबूरन मुझे क़ानूनी करवाही करनी पड़ेंगी। चूँकि में १६ वर्ष की थी तो घर वालों ने निर्णय लिया की मुझे दो साल और हॉस्टल में ही रहने देते है और फिर इसकी शादी कर देंगे।बस फिर क्या था मेरा बचपन कहाँ खो गया पता ही नही चला मैं कब बड़ी हो गयी वो दो साल में मेने छोटे मोटे कोम्पटिशन में भाग लेना स्टार्ट किया और क्लास ११ में हुयी career counsling में मुझे jet के exam तथा ऐग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी के बारे में पता चला, मैंने exam clear किया इस तरह संघर्ष के चलते में उदयपुर पहुँची।

कॉलेज में शुरू हुआ मेरा financial स्ट्रगल, चूँकि फ़ैमिली से कोई सपोर्ट नही था और ८००० रुपए की बचत थी तब तक पर एक दिन वो भी तो ख़त्म होनी थी, फिर में अपने ख़र्चे निकालने के लिए पार्ट टाइम जॉब्ज़ आइसक्रीम पार्लर, tellecaller, रिसेप्शनिस्ट होटेल आदि जगह में काम करती । १०-५ कॉलेज के बाद ६-११ तक काम करने के बाद जो बहुत थकान हो जाती थी इस तरह मेने अपनी पढ़ाई पूरी की । कॉलेज में में Ncc क सर्टिफ़िकेट में ओवर ऑल राजस्थान डिरेक्टरट में टोंप कर गोल्ड मेडल लिया। और गर्ल्ज़ कडेट अड्मिनिस्ट्रेटोर की जॉब मुझे मिली पर मुझे अफ़सर बनना था और में इंटर्व्यू clear नही कर पायी तो ११ महीने बाद मेने जॉब छोड़ दिया। क्यूँकि मुझे कुछ अलग करना था अपने सपने पूरे करने थे अपनी ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जीनी थी इसलिए मैंने जॉब छोड़ कर अपनी ख़ुद की कम्पनी नितांजू इवेंट्स बनायी टीम तैयार की, तब से आज तक कभी पीछे मुड़कर भी देखा आज में नितांजू इवेंट्स, नितांजू pvt लिमिटेड तथा nayara Nitanju association of young artist and रेक्रीएशनल ऐक्टिविटीज़ की CEO and director हूँ।

अब लोग मोटिवेशनल स्पीचके लिए बुलाते है जब लोगों से अपनी कहानी शेयर करती हो तो काफ़ी लोग प्रेरित होते है। Recently ऐग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा टॉप ५ entrepreneur में मेरा सम्मान किया गया था ।

ये थी मेरे संघर्ष की कहानी, की मैंने कभी हार नही मानी, और अपनी ज़िंदगी अपनी शर्तों पर अपने तरीक़े से जी रही हूँ। #JiyoDilSe #SheIsUdaipur #SheIsStrong

Role of Women as Educators

RJ Mahiya यांनी वर पोस्ट केले गुरुवार, ११ एप्रिल, २०१९

The role of women as an educator is at the front end of improvements leading to the development of all human beings transcending social, physical and cultural barriers. #SheIsUdaipur #EducateAGirlChild

Keeping our city clean and green – a woman on the frontline

When a work is considered as ones own, then it sustains for a longer duration. Abiding by the same philosophy and with a degree in chemistry she actively plants trees on all special life events and occasions like her kids birthdays etc. In her free time, she teaches orphans and strongly feels that it is important to teach our future generations about the need for cleanliness and good health. #GoGreen #SheIsUdaipur #SwachBharat